Role of Youth in Nation Building Essay

Role of Youth in Nation Building Essay | राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका पर निबंध

Role of Youth in Nation Building Essay


    भूमिका

    राष्ट्र के निर्माण में हमारे युवाओं की अति महत्वपूर्ण भूमिका है क्योंकि युवा शक्ति ही किसी भी राष्ट्र को प्रगति के पथ पर अग्रसर करने में सक्षम होते है। जैसा कि आप जानते हैं किसी भी देश की भावी पीढ़ी ही उस देश के विकास के लिए जिम्मेदार होती है, ऐसे में हर देश का युवा ही उस देश की पौध है।

    युवा देश में सामाजिक-आर्थिक और राजनीतिक सुधार के वाहक होते हैं। ऐसे में राष्ट्र के प्रत्येक युवा को राष्ट्रहित में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करनी होगी, तभी वह देश का सर्वांगीण विकास कर पाएंगे और देश प्रगति पथ पर अग्रसरित हो पायेगा।

    राष्ट्रीय निर्माण का क्या अर्थ होता है?

    राष्ट्र निर्माण से तात्पर्य किसी भी राष्ट्र के सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक विकास से है अर्थात किसी भी राष्ट्र के बुनियादी ढांचे का विकसित होना ही राष्ट्र निर्माण कहलाता है। जब किसी देश में उसके प्रत्येक नागरिक को अपना विकास करने के लिए समान अवसर उपलब्ध होता है, तब इसे राष्ट्र निर्माण कहा जाता है।

    युवा: राष्ट्र का भविष्य

    किसी भी देश के युवा उस देश का भविष्य तय करते हैं। यूं तो युवाओं की संख्या देश में 30 से 40 फ़ीसदी ही होती है लेकिन यही युवा यदि राष्ट्र की प्रगति में अपना 10 फीसदी भी देते हैं तो राष्ट्र को विकास करने से कोई नहीं रोक सकता। इसीलिए जरूरी है कि युवाओं को सकारात्मक दिशा में प्रशिक्षित करना चाहिए जिससे वे बड़े होकर राष्ट्र के निर्माता बने।

    युवाओं को राष्ट्र निर्माता इसीलिए भी कहा जाता है क्योंकि वे एक ऐसे उम्र में होते हैं जो बदलाव लाने में सक्षम होता है। इसके अलावा भी युवाओं में कई विशेषताएं होती है। चलिए जानते हैं उनके इनके बारे में:-

        1. युवा उत्साह और क्षमता से भरे होते हैं इसीलिए किसी भी कार्य को अपने पूरे मन से करने में सक्षम होते हैं।

        2. युवाओं में बेहतर विचार क्षमता होती है जिससे वे नई-नई तरकीबों को खोज निकालते हैं। 

        3. इसके साथ ही युवा रचनात्मकता और सीखने के कौशल से परिपक्व होते हैं।

        4. युवा सालों से चली आ रही पुरानी कुरीतियों को मिटाने में सक्षम होते हैं।

        5. युवाओं को देश की आवाज़ कहा जाता है क्योंकि जिस भी मुद्दे में वे आवाज उठाते हैं उसमें बदलाव लाने में कामयाब होते हैं।

        6. प्रत्येक देश को ऐसे अवसरों व प्रक्रियाओं को अपनाना होगा जिसके द्वारा, युवाओं का सशक्तिकरण हो सके और वह स्वयं प्रगति पथ पर चल कर देश का मान बन सकें।

    यह थी युवाओं की कुछ खासियत, हालांकि युवाओं को देश के विकास में भूमिका अदा करने के लिए भी कुछ समस्याओं और चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

    आइए एक नज़र डालते हैं कि देश के युवाओं के समक्ष ऐसी कौन-सी समस्याएं हैं जो उन्हें देश के उत्थान में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने से रोकती है-

    समस्याएं

    1. गरीबी

    किसी भी देश के विकास की राह में गरीबी हमेशा रोड़ा बनती है। इसी तरह यह युवाओं को भी विकास करने से रोकती है। कई लोग गरीबी और बेरोजगारी के चलते अपने बच्चों को शिक्षित नहीं कर पाते जिससे बच्चों को गुणवत्ता पूर्वक शिक्षा हासिल नहीं होती और वे समाज विरोधी गतिविधियों में लिप्त हो जाते हैं। इसीलिए यह प्रयत्न किया जाना चाहिए कि हर बच्चा स्कूल में अपनी शिक्षा जरूर हासिल कर पाए।

    2. लड़कियों को शिक्षा से वंचित

    हमारे समाज में सालों से लड़कियों को विकास करने से रोका गया है। अक्सर लड़कियों को स्कूल जाने और पढ़ने-लिखने का मौका नहीं दिया जाता। क्योंकि ऐसा माना जाता है कि लड़कियां सिर्फ शादी और चूल्हा-चौका करने के लिए बनी हैं। समाज से हासिल इस उपेक्षा के चलते लड़कियों का समग्र विकास नहीं हो पाता।

    3. रोजगार न मिलना

    बहुत सारे युवा रोजगार ना होने की वजह से समाज विरोधी गतिविधियों में लिप्त होते हैं और अपने जीवन को नष्ट कर देते हैं इसीलिए इन युवाओं को रोजगार प्रदान करना चाहिए।

    4. युवाओं में कौशल की कमी

    प्रत्येक सरकार को युवाओं के कौशल को बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों को जारी करना चाहिए जिससे सभी युवाओं को अपने कौशल को विकसित करने के लिए बराबर अवसर मिले।

    5. सुविधाओं से वंचित

    शहर में रहने वाले युवाओं को तो प्रगति के अवसर मिल जाते हैं, लेकिन वहीं गांव में रहने वाले युवाओं को सभी तरह की सुविधाएं नहीं मिल पाती जो कि उनके विकास को रोकती है।

    6. मार्गदर्शन का अभाव

    कई बार देखा गया है कि युवाओं को उचित मार्गदर्शन ना मिलने की वजह से वे गलत रास्तों को अपनाते हैं इसीलिए युवाओं को उचित मार्गदर्शन प्रदान करना चाहिए।

    7. संसाधनों की कमी

    जब युवा आवश्यक संसाधनों से वंचित रह जाते हैं तब वे खुद का विकास नहीं कर पाते।

    हालांकि, कई बार देखा गया है कि युवाओं को विकास करने से रोकने में स्वयं युवा ही जिम्मेदार होते हैं क्योंकि बहुत से युवा ऐसे हैं जो ज्यादा श्रम नहीं करना चाहते और यही वजह है कि वे बेरोजगारी से ग्रस्त है। इसीलिए युवाओं के बीच जागरूकता को फैलाना जरूरी है जिससे वे अपने दायित्वों को समझ सके और उसी राह में कार्य कर सकें।

    इस तरह हम कह सकते हैं कि कई बार युवाओं को विकास करने से रोकने के लिए सिर्फ वे स्वयं जिम्मेदार नहीं होते बल्कि कई बार इसमें राष्ट्र की भी भूमिका होती है। बहुत से युवा जन्मजात प्रतिभा के धनी होते हैं। लेकिन उन्हें अपनी इस प्रतिभा को विकसित करने के लिए उचित प्रशिक्षण और संसाधन हासिल नहीं होते जिस वजह से वे पिछड़ जाते हैं। 

    इसीलिए सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि प्रत्येक छात्र को अपना विकास करने के लिए समान अवसर मिले जिससे वे अपनी प्रतिभाओं को विकसित कर देश के विकास में अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर सकें।

    युवाओं की भागीदारी

    वर्तमान समय में ही नहीं बल्कि इतिहास में कई ऐसे मौके आए जब युवाओं ने अपनी शक्ति का परचम लहराया है। जब भारत को अंग्रेजों के चंगुल से आजाद करने के लिए स्वतंत्रता संग्राम चलाया जा रहा था तब इसमें बहुत से युवाओं ने अपना योगदान दिया और उनके सक्रिय योगदान के चलते देश आजाद हुआ। और समस्त देशवासियों को ब्रिटिश शासन से मुक्ति मिली।

    इसके अलावा समय-समय पर युवाओं ने चिकित्सा, शिक्षा, तकनीक, प्रद्योगिकी जैसे कई क्षेत्रों में अपनी भूमिका सुनिश्चित की है। यही वजह है कि आज देश इन सभी क्षेत्रों में खुद को मजबूत कर रहा है।

    निष्कर्ष

    किसी भी देश का विकास उसकी जनता पर टिका हुआ है इसीलिए देश के विकास के लिए इसके प्रत्येक नागरिक को अपना योगदान देना चाहिए। इसके लिए उन्हें अपने कर्तव्यों का निर्वहन करना, ईमानदारी के साथ देश की प्रगति संबंधित कार्य में अपनी भूमिका निभाना, देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की ओर कार्य करना चाहिए। 

    प्रत्येक राष्ट्र को युवाओं से कई उम्मीदें होती हैं इसीलिए युवाओं को अपनी पूरी क्षमता और ऊर्जा के साथ इन उम्मीदों पर खरा उतरना होगा। हालांकि युवाओं के विकास के लिए देश के सरकार को भी उनके लिए महत्वपूर्ण कदम उठाने होंगे। जिससे कोई भी युवा अवसरों से वंचित न हो।

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