Eye Donation Essay in Hindi

Eye Donation Essay in Hindi | नेत्रदान पर निबंध

Eye Donation Essay in Hindi


    भूमिका

    प्रत्येक व्यक्ति अपने लिए तो जीता ही है, लेकिन उस व्यक्ति के जीवन को सफल माना जाता है जो अपने लिए ही नहीं बल्कि दूसरों के लिए भी जीना जानता हो। विश्व में कई ऐसे लोग मौजूद हैं जो कि अंधत्व के शिकार हैं। इन लोगों के जीवन में उजाला नेत्रदान के जरिए आ सकेगा। नेत्रदान एक ऐसा दान है जिसके लिए हमें कहीं और से कुछ दान नहीं करना पड़ता। बल्कि हमारे पास जो चीज मौजूद है, हम उससे ही कई लोगों की जिंदगी को रोशन कर सकते हैं।

    जीवन में आंखों का महत्व

    हमारे शरीर के प्रत्येक अंग का अपना अलग महत्व होता है। लेकिन इसमें आंख काफी महत्वपूर्ण होते हैं। आंखें हमें पूरी दुनिया में मौजूद रंगो, अच्छी-बुरी चीजों को देखने में सक्षम बनाते हैं। यदि किसी व्यक्ति के जीवन में दृष्टि ना हो तो उसका जीवन अंधकार में बीतता है। प्रत्येक कार्य के लिए उसे दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता है। ऐसे व्यक्ति में क्षमताएं होने के बावजूद भी वह नेत्रहीनता की वजह से अपनी क्षमताओं का सदुपयोग नहीं कर पाता। 

    नेत्रदान की आवश्यकता क्यों है?

    आंकड़ों की मानें तो आज हमारे देश में ही जन्म लेने वाले प्रति हजार शिशुओं में से 9 शिशु नेत्रहीन पैदा होते हैं। ऐसे में नेत्रहीन शिशुओं के जीवन में उजाला नेत्रदान के जरिए भरा जा सकता है। आंकड़ों की मानें तो हर साल हमारे देश में करीब 30 लाख लोग मृत्यु को प्राप्त होते हैं। अगर इन 30 लाख लोगों में से 1% लोग भी नेत्रदान के लिए आगे बढ़ते हैं तो हमारे देश में नेत्रहीन लोगों की तादाद कम हो सकती है। नेत्रदान हमेशा मृत्यु के बाद ही किया जाता है। जीवित शख्स अपनी आंखों को दान नहीं कर सकते। इसीलिए हम नेत्रदान के जरिए किसी और को हमारी आंखों के ज़रिए सारी दुनिया देखने में सक्षम बना सकते हैं। 
    नेत्रदान कोई भी कर सकता है। लेकिन इसके लिए भी कुछ निश्चित पैमाना मौजूद है। आइए जानते हैं कि वह कौन-से लोग हैं जो अपने आंखों को दान करने में सक्षम है :-

        • कई लोग यह समझते हैं कि अगर आपकी नजर कमजोर है, तो आप नेत्रदान नहीं कर सकते। लेकिन यह गलत धारणा है। अगर आपकी नजर कमजोर व आप चश्मा भी लगाते हैं तब भी आप आंखों को दान कर सकते हैं।
        • जो लोग मोतियाबिंद, डायबिटीज, बीपी के मरीज है वे भी अपनी आंखों को दान कर सकते हैं।
        • इसके साथ ही कई नेत्रहीन लोग जो कि रेटिनल या ऑप्टिक नर्व जैसी बीमारी की वजह से देख नहीं पाते, लेकिन उनका कॉर्निया ठीक होता है वे भी नेत्रदान कर सकते हैं।
        • वे लोग जो हेपेटाइटिस, सिफलिस और रेबीज़ एड्स जैसी बीमारियों की वजह से अपनी जिंदगी गवा बैठे हैं, वे नेत्रदान नहीं कर सकते।
        • वहीं यदि आप किसी दूरदराज वाले इलाकों में रहते हैं जहां पर आई बैंक को पहुंचने में काफी समय लग जाता है तो ऐसे लोग नेत्रदान नहीं कर सकते क्योंकि नेत्रदान के लिए मरने के 6 घंटे के अंदर ही आंखों को निकालना जरूरी होता है।

    नेत्रदान किस तरह किया जाता है?

        • किसी व्यक्ति की मृत्यु होने के 6 घंटे के भीतर ही भीतर आई बैंक वालों को सूचित करना जरूरी होता है जिससे वे बॉडी से आंखों को निकाल सकें।
        • लेकिन नेत्रदान करने से पहले कुछ चीजों का ध्यान रखना पड़ता है जैसे आई बैंक वालों के आने से पहले ही मृत्यु को प्राप्त हो चुके व्यक्ति के सर को 6 इंच तक ऊपर उठा कर रखना चाहिए।
        • जिस व्यक्ति की मृत्यु हो चुकी है उसकी आंखों को बंद करना चाहिए तथा आंखों पर गीली रुई को रखना चाहिए।
        • हो सके तो पंखा, कूलर, AC आदि को बंद कर देना चाहिए। अगर आपके पास कोई एंटीबायोटिक आई ड्रॉप मौजूद हो तो उसे मरने वाले की आंखों में लगा देना चाहिए। ऐसा करने से आंखों में किसी तरह का इन्फेक्शन नहीं होता।
        • जब नेत्रदान किया जाता है तो उस दौरान व्यक्ति की आंखों को पूरी तरह से नहीं निकाला जाता। ऐसे में आंखों में गड्ढा नजर नहीं आता। क्योंकि डॉक्टर आंखों से सिर्फ कॉर्निया को ही बाहर निकालते हैं जिससे आंख देखने में पहले जैसे ही प्रतीत होते हैं।
        • आंखों के कॉर्निया को किसी भी व्यक्ति में लगाया जा सकता है क्योंकि इसमें ब्लड वेसल्स नहीं होती।

    नेत्रदान से जुड़ी कुरीतियां

    लेकिन बहुत से लोग नेत्रदान जैसा पुण्य कार्य नहीं करते। कुछ लोगों में डर होता है तो कुछ लोग समाज में मौजूद गलत धारणाओं की वजह से यह कदम नहीं उठाते। हमारे समाज में ऐसी कई गलत धारणाएं मौजूद है जो लोगों को नेत्रदान करने से रोकती हैं। कई लोगों का मानना है कि पृथ्वी में ईश्वर ने हमें संपूर्ण अंगों के साथ भेजा है। अगर हमारा कोई भी अंग खराब या क्षतिग्रस्त हो जाता है तो हमें उसी हालत में ही ईश्वर के पास जाना होता है। 

    लेकिन यह बात बिल्कुल सही नहीं है क्योंकि इंसान सिर्फ शरीर के साथ ही नहीं बल्कि आत्मा के साथ भी आता है। मृत्यु के बाद हमारा शरीर तो मिट्टी में मिल जाता है लेकिन आत्मा अमर रहती है। इसके अलावा कई लोग यह भी कहते हैं कि जब हम इस जन्म में नेत्रदान करते हैं तो अगले जन्म में हम नेत्रहीन पैदा होते हैं। लेकिन सभी धर्मों में भी कहा जाता है कि पुण्य काम के बदले अच्छा फल मिलता है। ऐसे में अगर हम नेत्रदान जैसा पुण्य कार्य करके किसी के जीवन को रोशन करते हैं तो ऐसे में आखिर हम नेत्रहीन क्यों पैदा होंगे। 

    इसके अलावा कई बार लोग नेत्रदान करने का संकल्प कर लेते हैं लेकिन वे नेत्रदान नहीं कर पाते। दरअसल, बहुत से लोग नेत्रदान का संकल्प पत्र भरने के बावजूद अपने परिवार को इस बारे में नहीं बताते जिस वजह से उनकी मृत्यु होने पर आई बैंक को इस बारे में कोई जानकारी नहीं मिलती और उनकी आंखों का सदुपयोग नहीं हो पाता। इसीलिए जो लोग नेत्रदान करने का संकल्प करते हैं उन्हें इस बारे में जानकारी अपने परिजनों को देनी जरूरी होती है। जिससे उचित समय आने पर उनके परिजन उनका नेत्रदान कर सकें।

    विश्व नेत्रदान दिवस

    लोगों के बीच मौजूद गलत कुरीतियों, धारणाओं को दूर करने तथा लोगों को नेत्रदान के लिए प्रेरित और प्रोत्साहित करने के लिए विश्व भर में ‘विश्व नेत्रदान दिवस’ मनाया जाता है। इसे अंग्रेजी में ‘World Eye Donation Day’ कहा जाता है। विश्व नेत्रदान दिवस को कई अन्य नामों से भी जाना जाता है, इसे ‘आंख दान करने का दिन’, ‘दृष्टिदान दिवस’, ‘अंतरराष्ट्रीय नैन दान दिवस’ के रूप में भी जाना जाता है। विश्व भर में कई देश इसे मनाते हैं। हर साल 10 जून को विश्व नेत्रदान दिवस मनाया जाता है। इस दिन लोगों के बीच नेत्रदान के लिए जागरूकता फैलाई जाती है। उसके साथ ही लोगों को प्रोत्साहित किया जाता है कि वे नेत्रदान करें।

    विश्व नेत्रदान दिवस के दौरान सिर्फ लोग ही नहीं बल्कि कई अस्पताल भी अलग-अलग अभियान चलाते हैं। वे लोगों को नेत्रदान से संबंधित जानकारियां देते हैं तथा इसके बारे में जागरूकता फैलाते हैं। बहुत से बुजुर्ग लोगों से भी अपील की जाती है कि वे नेत्रदान जैसा पुण्य कार्य करें।

    निष्कर्ष

    इस तरह हम कह सकते हैं कि नेत्रदान करना नितांत आवश्यक है। नेत्रदान के जरिए ना सिर्फ हम दृष्टि हीनता जैसी बड़ी समस्या को दूर कर सकते हैं, बल्कि हम देश के विकास में अपना योगदान दे सकते हैं। दरअसल, नेत्रहीन व्यक्ति अपनी क्षमताओं का उचित उपयोग नहीं कर पाता अगर हम नेत्रदान के जरिए उन्हें दृष्टि प्रदान करते हैं तो इससे वे अपनी क्षमताओं का उचित उपयोग करके देश के विकास में अपनी भागीदारी दे सकते हैं। ऐसे में अगर आप एक सफल जीवन जीना चाहते हैं तो अपने नेत्रों के जरिए लोगों की मदद कर सकते हैं। आप अपनी आंखों से कई लोगों के जीवन में रोशनी ला सकते हैं।

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