Essay On Man Made Disaster in Hindi

Essay On Man Made Disaster in Hindi | मानव निर्मित आपदा पर निबंध

Essay On Man Made Disaster in Hindi


    भूमिका

    पर्यावरण ने मनुष्य को सब कुछ दिया। लेकिन यही पर्यावरण कई बार मनुष्य से उसका सब कुछ छीन भी लेता है। समय-समय पर आने वाली प्राकृतिक और मानव निर्मित आपदाओं की वजह से ना जाने कितने ही लोगों की मृत्यु और उनकी संपत्ति को नुकसान पहुंचता है। 

    लेकिन समय रहते इन आपदाओं से निपटने के लिए पहले से ही तैयारी करना जरूरी है जिससे आपदाओं के प्रभाव को कम किया जा सके। मानव निर्मित आपदाओं को समझने से पहले यह जाना जरूरी है कि आखिर आपदाएं कितने प्रकार की होती हैं? 

    आपदाओं के प्रकार

    आपदा मुख्यतः दो प्रकार की होती हैं। एक है प्राकृतिक आपदा और दूसरी मानव निर्मित आपदा।

    प्राकृतिक आपदा

    आपदाएं जो प्रकृति द्वारा स्वयं उत्पन्न होती है, उन्हें प्राकृतिक आपदा कहा जाता है। उदाहरण के रूप में बाढ़, सूखापन आदि।

    मानव निर्मित आपदा

    यह आपदाएं प्राकृतिक आपदाओं से अलग होती हैं क्योंकि यह मनुष्य की मंशा, लापरवाही, गलती की वजह से हो सकती हैं। उदाहरण के रूप में आग लगना, इमारत का गिरना आदि।

    आइए मानव निर्मित आपदाओं के बारे में विस्तार से जानते हैं।

    मानव निर्मित आपदाएं किसे कहते हैं?

    वे आपदाएं जो मानवीय गतिविधियों के परिणामस्वरूप पैदा होती हैं, उन्हें मानव निर्मित आपदाएं कहा जाता है। मानव निर्मित आपदाएं कई कारणों से उत्पन्न होती है। कई बार जब ख़तरों को नजरअंदाज किया जाता है या फिर किसी चीज के विफल हो जाने पर यह पैदा होती है। 

    इसके अलावा कई बार मानव निर्मित आपदाओं को जानबूझकर उद्देश्यपूर्ण तरीकों से उत्पन्न किया जाता है। जैसे कि आतंकवादी हमला, जो मानव की लापरवाही की वजह से उत्पन्न होती है। इन्हें भी मानव निर्मित आपदाओं की श्रेणी में शामिल किया जाता है। उदाहरण के रूप में सड़क दुर्घटनाएं आदि।

    मानव निर्मित आपदाओं के कारण

    मानव निर्मित आपदाएं भिन्न-भिन्न कारणों से होती है। कई बार इसके कारणों में बढ़ती जनसंख्या, औद्योगीकरण तथा अलग-अलग तरह की दुर्घटनाएं शामिल होती है, तो कई बार यह घटनाएं लोगों की अनदेखी और अज्ञानता की वजह से भी होती है।

    इसके साथ ही मानव निर्मित आपदाओं में लोगों द्वारा जानबूझकर की गई गतिविधियां भी शामिल होती है। जैसे कि तोड़फोड़ करना, दंगा फसाद करना, लोगों पर हमला करना आदि। और कई बार यह औद्योगिक कारणों की वजह से होती है जिनमें गैस का रिसाव होना, विस्फोट होना, आग लगना, किसी तंत्र का विफल होना आदि शामिल होता है।

    मानव निर्मित आपदाओं के प्रकार 

    मानवीय गतिविधियां कई बार आपदाओं को जन्म देती है। इन आपदाओं में आग लगना, सड़क, रेल, और हवाई दुर्घटना, औद्योगिक दुर्घटना, आतंकवाद व युद्ध आदि शामिल है। इन आपदाओं से मानव के जीवन की क्षति होने के साथ ही पर्यावरण को भी काफी नुकसान पहुंचता है।

    दुर्घटनाएं

    कई दुर्घटनाएं मानव निर्मित आपदाओं में शामिल है। इसमें सड़क, समुद्र, रेल, विमान दुर्घटना, भवनों का ढहना आदि शामिल है।

    औद्योगिकीय दुर्घटनाएं

    औद्योगिक घटनाओं में आग लगना, विस्फोट होना, तकनीकी तंत्र में खराबी होना आदि शामिल है।

    युद्ध

    कई बार लोगों के बीच आपसी रंजिश की वजह से आतंकवाद, दंगा-फसाद, लूटमार जैसी आपराधिक गतिविधियां होती हैं।

    भारत की कुछ सबसे बड़ी मानव निर्मित आपदाएं

    मानव निर्मित आपदाओं ने न सिर्फ पूरी दुनिया को परेशान किया है बल्कि भारत ने भी कई आपदाओं को झेला है। इन आपदाओं में कई लाखों लोगों ने अपनी जान गवाई है। ऐसे में इन आपदाओं का निवारण करना जरूरी होता है।

     आइए जानते हैं भारत में घटित कुछ बड़ी मानव निर्मित आपदाओं के बारे में:-

    1. भोपाल गैस त्रासदी

    भारत में संचालित किए जा रहे, कई उद्योग प्राधिकरण द्वारा निर्धारित किए गए मानक संचालन प्रक्रिया और प्रोटोकॉल का पालन नहीं करते जिस वजह से कई बड़ी घटनाएं घटित हो जाती है। इन घटनाओं में से एक थी भोपाल गैस त्रासदी। यह घटना दो 3 दिसंबर 1994 को घटित हुई। जहां यह घटित हुई उस कारखाने का स्वामित्व यूनियन कार्बाइड के पास था। इस कारखाने से मनुष्य के लिए विषैली माने जाने वाली मिथाइल आइसोसाइनेट गैस लीक हो गई। 

    यह गैस कारखाने के साथ-साथ उसके आसपास के इलाकों में फैल गई थी जिस वजह से जहां कई लोगों की नींद में मौत हो गई, तो कई लोग बाहरी गैस के संपर्क में आकर मर गए। इसने न सिर्फ कई लोगों की जान ली बल्कि इसकी वजह से कई लोग शारीरिक और मानसिक रूप से अपाहिज भी हो गए। 

    आंकड़ों के मुताबिक इस रासायनिक गैस से करीब 10,000 लोगों ने अपनी जिंदगी खो दी। और 5.5 लाख लोग इससे शारीरिक और मानसिक रूप से प्रभावित हुए। आज भी कई लोग इसकी वजह से शारीरिक क्षति का सामना कर रहे हैं।

    2. प्रयागराज के महाकुंभ मेले में भगदड़

    3 फरवरी 1954 में उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में महाकुंभ मेला आयोजित किया गया था। महाकुंभ मेले में उचित प्रबंधन और निगरानी ना होने की वजह से यहां भगदड़ मच गई जिसमें 820 लोगों की मौत हुई तथा 100 से ज्यादा लोग बुरी तरह घायल हुए।

    3. कोलकाता पुल हादसा

    पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के गिरीश पार्क में 31 मार्च 2016 को एक ऐसी घटना घटी जिसने कई लोगों की जान ले ली। दरअसल 31 मार्च 2016 को गिरीश पार्क में मौजूद एक निर्माणाधीन पुल ढह गया तथा इस पुल के गिरने से 27 लोगों की मौत हुई। इस हादसे में 80 लोग घायल हुए।

    4. ललिता पार्क में घटित भवन दुर्घटना

    आज से 10-12 साल पहले 15 नवंबर 2010 को पश्चिम दिल्ली में स्थित ललिता पार्क में एक पांच मंजिला मकान ढह गया। इस भवन के गिरने से 66 लोगों की मौत हुई तथा इसमें 80 लोग घायल हुए। जैसा कि आप जानते हैं भारत में कई बार इस तरह की घटनाएं घट चुकी है। ज्यादातर घटनाएं अवैध निर्माण तथा मौजूदा इमारतों की ठीक से निगरानी ना रखने की वजह से घटती है।

    5. कोलकाता के AMRI अस्पताल में आग

    कोलकाता में मौजूद एक अस्पताल की बेसमेंट में भीषण आग लगी जिसमें 90 के करीब लोगों की मृत्यु हुई और कई लोग घायल हुए। जिन लोगों की मृत्यु हुई उनमें अधिकतर अस्पताल के रोगी थे।

    मानव निर्मित आपदा से बचने के उपाय

        • भवन निर्माण के दौरान इमारतों की संरचना की जांच इंजीनियरों से करवाई जानी जरूरी है।

        • लोगों को बड़े और भारी गाड़ियों को खरीदने के बजाय साइकिल खरीदनी चाहिए क्योंकि साइकिल से जहां प्रदूषण को रोकने में मदद मिलती है, वही यह फिटनेस के लिए भी काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

        • दुर्घटनाओं से बचने के लिए लोगों को शराब पीकर गाड़ी चलाना नहीं चाहिए तथा गाड़ी चलाने के दौरान किसी भी तरह का फोन कॉल अटेंड नहीं करना चाहिए।

        • आतंकवाद जैसी घटनाओं पर पाबंदी लगाने के लिए सभी देशों को मित्रता की पहल करनी चाहिए। अगर तब भी इन घटनाओं पर लगाम ना लगे तो देश को अपनी सुरक्षा को मजबूत करना चाहिए।

        • इनसे बचने के लिए लोगों को अपने व्यवसाय में कड़ी सुरक्षा रखनी चाहिए। इसके साथ ही उन्हें विभिन्न मानकों का भी ध्यान रखना चाहिए। आप तो जानते ही होंगे भोपाल गैस त्रासदी सबसे बड़ी औद्योगिक घटना थी।

    निष्कर्ष

    मनुष्य की गलत गतिविधियां कई लोगों के जान-माल की हानि का कारण बनती है। इस तरह की आपदाएं ना सिर्फ बड़ी मात्रा में नुकसान करती है, बल्कि यह किसी देश की प्रगति को भी रोकती है। कभी-कभी तो इन आपदाओं की वजह से जीवन की धारा में भी रुकावट पैदा हो जाती है। वैसे तो इस तरह की आपदाओं को रोकना मनुष्य के हाथ में है, लेकिन उचित कदम उठाने की वजह से यह घटनाएं बार-बार घटित होती रहती हैं। इन जोखिमों से बचने के लिए उचित प्रबंधन और नियंत्रण करना जरूरी है।

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