Waste Management Essay in Hindi

Waste Management Essay in Hindi

Waste Management Essay in Hindi | अपशिष्ट प्रबंधन पर निबंध

    हर मनुष्य अपने दैनिक क्रियाकलाप के दौरान कई तरह के कचरे उत्पन्न करता है। लेकिन जब इसी कचरे का उचित प्रबंधन नहीं होता तो यह मनुष्य और प्रकृति के लिए घातक बन जाता है। इसीलिए प्रकृति और मनुष्य को इस खतरे से बचाने के लिए अपशिष्ट प्रबंधन करना काफी जरूरी होता है। मौजूदा समय में प्लास्टिक तथा गैर बायोडिग्रेडेबल कचरे का उचित तरीके से निपटान करना एक चुनौती से कम नहीं है। आज के इस आर्टिकल में हम आपको अपशिष्ट प्रबंधन या कचरे के प्रबंधन का निबंध बताएंगे।

    भूमिका

    वर्तमान समय में बहुत से विकसित और विकासशील देश लगातार प्रगति की ओर बढ़ रहे हैं। इस प्रगति ने हमारे जनजीवन को काफी आसान बना दिया है। आज हर कोई गांवों को छोड़कर शहरों में निवास करना चाहता है जिसने शहरीकरण की प्रक्रिया को और भी तीव्र कर दिया है। यही वजह है कि आज दुनिया की आधी से ज्यादा आबादी शहरों में निवास करने लगी है। लेकिन इस शहरीकरण से हमारे पर्यावरण को काफी ज्यादा नुकसान पहुंचा है। इसके पीछे की वजह यह है कि विकसित कहे जाने वाले इन्हीं शहरों में आज स्वच्छता नदारद है।


    आज बड़े-बड़े शहरों में भी हमें कूड़ा-कचरा जगह-जगह देखने को मिलता है। इस कूड़े कचरे का उचित प्रबंधन ना होने की वजह से आज यह प्रकृति और जनजीवन के लिए खतरा बन चुका है। आइए हम जानते हैं कि अपशिष्ट प्रबंधन आखिर क्या होता है? तथा अपशिष्ट प्रबंधन हम कैसे कर सकते हैं।

    अपशिष्ट प्रबंधन (कचरे का प्रबंधन) किसे कहते हैं?

    हम अपने दैनिक जीवन में कई तरह के कचरे उत्पन्न करते हैं। यह कचरे तरल, ठोस तथा किसी भी रूप में हो सकते हैं। हर तरह के कचरे को सही तरीके से निपटाने के लिए एक प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। इस प्रक्रिया के जरिए कचरे का प्रबंधन किया जाता है जिससे कि यह मनुष्य व प्रकृति के लिए खतरा साबित ना हो। यही पूरी प्रक्रिया कचरा प्रबंधन या अपशिष्ट प्रबंधन के नाम से जानी जाती है।

    अपशिष्ट प्रबंधन क्यों जरूरी है?

    अपशिष्ट का प्रबंधन करना काफी महत्वपूर्ण कार्य है क्योंकि इसकी वजह से मनुष्य, जीव जंतु और पर्यावरण को काफी नुकसान पहुंचता है। औद्योगिक कचरे, भूमि की उर्वरक क्षमता को नष्ट कर देते हैं जिससे नई पैदावार होना मुश्किल होता है। इसके अलावा इन खतरों से हैजा, मलेरिया, पीलिया टीवी जैसे कई तरह की घातक बीमारियां पैदा होती है। इन बीमारियों से बचने के लिए समय रहते अपशिष्ट प्रबंधन करना जरूरी होता है।

    इसके अलावा आजकल इलेक्ट्रॉनिक अपशिष्ट काफी ज्यादा उत्पन्न हो रहा है। इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के बढ़ जाने की वजह से अब इलेक्ट्रॉनिक अपशिष्ट की मात्रा बढ़ने लगी है। इसे ई-कचरे के रूप में भी जाना जाता है। इस तरह के अपशिष्ट में मरकरी, जैसे जहरीले पदार्थ पाए जाते हैं जो मनुष्य के स्वास्थ्य, पर्यावरण और जानवरों के लिए घातक होते हैं। इनमें प्लास्टिक, चमड़ा इलेक्ट्रॉनिक सामान, दवाई की शीशी आदि शामिल होती है। इस तरह के कचरे सालों साल रहने के बावजूद खत्म नहीं होते।

    हम में से कई लोग कचरे को समुद्र या फिर भूमि में फेंक देते हैं। लेकिन यह समुद्र में रहने वाले जीव-जंतुओं को काफी ज्यादा नुकसान पहुंचाता है, वही भूमि प्रदूषण को भी बढ़ाता है। इस कचरे का उचित निपटान ना होने की वजह से भूमि बंजर हो जाती है। इस तरह के कचरे एक जगह पर जम जाते हैं और उनमें से बदबू आने लगती है, जो कि कई बीमारियों का दस्तक लेकर आती है। वहीं जिन अपशिष्टों को समुद्र, नदियों तालाबों में फेंका जाता है वह नालियों में बह कर जल स्रोतों में घुल जाते है तथा जल प्रदूषण उत्पन्न करते है।

    जब इसी कचरे को जला दिया जाता है तो यह वायु में मिलकर वायु प्रदूषण उत्पन्न करता है इसीलिए अलग-अलग तरह के इन प्रदूषणों और मुश्किलों से बचने के लिए हमें कचरे का उचित प्रबंध करना जरूरी है।

    अपशिष्ट प्रबंधन कैसे किया जाता है?

    Essay Waste Management in Hindi


    जैसे कि हमने आपको बताया कि कचरा ठोस, तरल, कठोर जैसे कई रूपों में पाया जाता है। अलग-अलग तरह के कचरे का प्रबंधन करने के लिए अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल किया जाता है। आइए जानते हैं अपशिष्ट प्रबंधन के विभिन्न तरीकों के बारे में:-

    1. भस्मीकरण की प्रक्रिया

    मनुष्य द्वारा बहुत से ठोस कचरे को उत्पन्न किया जाता है। इस ठोस कचरे का निपटान करना काफी कठिन कार्य होता है इसीलिए इसे नष्ट करने के लिए इन्हें ऊंचे तापमान में जला दिया जाता है। यही प्रक्रिया भस्मीकरण अथवा दहन कहलाती है यानी कि जब कचरे को जलाकर नष्ट किया जाता है तो यह भस्मीकरण की प्रक्रिया कहलाती है।

    2. लैंडफिल

    लैंडफिल जैसा कि नाम से ही पता चलता है, इस तरह के कचरे को जमीन में दफन कर दिया जाता है। फिर इसे मिट्टी की परत से ढक दिया जाता है। सालों साल यह कचरे मिट्टी के अंदर रहकर विघटित हो जाते हैं तथा पूरी तरह से नष्ट हो जाते हैं। मिट्टी में कचरे को दफन करने की प्रक्रिया काफी ज्यादा प्रचलित है।

    3. पुनर्चक्रण

    पुनर्चक्रण किसी भी कचरे को दोबारा नए तरीके से बनाकर इसे नई सामग्री में तब्दील करने की प्रक्रिया है। इस प्रक्रिया को काफी महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इससे कचरे को दोबारा इस्तेमाल किया जाता है। रीसाइक्लिंग की प्रक्रिया में प्लास्टिक के रैपर या फिर बैग को फेंकने की जगह थैलियों को रिसाइकल करके उत्पादित कर एकत्रित किया जाता है।

    4. खाद

    हमारी रसोई तथा पेड़ पौधों से भी कई तरह के प्राकृतिक कचरे उत्पन्न होते हैं। इन सभी कचरे को जैविक कचरों के नाम से जाना जाता है। इस तरह की कचरे को विघटित करके इन्हें खाद में परिवर्तित किया जाता है जो कि पेड़-पौधों के विकास के लिए जिम्मेदार होते हैं। तथा पेड़ पौधों के लिए उर्वरक के रूप में कार्य करते हैं।

    5. गैसीकरण की प्रक्रिया

    गैसीकरण की प्रक्रिया में कचरे को उच्च तापमान में विघटित किया जाता है। लेकिन इसे बहुत कम ऑक्सीजन वाले क्षेत्रों में किया जाता है जिससे कि पर्यावरण में प्रदूषण कम उत्पन्न होता है।

    6. पाइरोलोसिस

    यह प्रक्रिया भी गैसीकरण प्रक्रिया से काफी ज्यादा मिलती-जुलती है। हालांकि इस प्रक्रिया में कचरे को कम ऑक्सीजन में विघटित किया जाता है, जबकि इस प्रक्रिया में कचरे का दहन ऑक्सीजन के बिना किया जाता है। इस प्रक्रिया को किसी भी तरह का नुकसान नहीं पहुंचता।

    ऊपर बताए गए इन तरीकों की मदद से आप अपने कचरे का विघटन कर सकते हैं

    अपशिष्ट प्रबंधन में नागरिक की भूमिका

    अपनी प्रकृति को बचाने के लिए प्रत्येक नागरिक को अपशिष्ट प्रबंधन करना चाहिए। हमारे वातावरण और प्रकृति के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक प्लास्टिक होते हैं। यह धीरे-धीरे हमारी धरती को अंदर से खोखला कर रहे हैं। साथ ही यह लोगों के लिए भी काफी खतरनाक साबित हुए हैं। ऐसे में प्रत्येक नागरिक कि जिम्मेदारी है कि वह प्लास्टिक और उससे बने उत्पादों का इस्तेमाल कम से कम करें जिससे प्लास्टिक के उत्पादन में अंकुश लग सके। इसके अलावा प्रत्येक व्यक्ति को अपने घर से निकलने वाले कार्बनिक और अकार्बनिक कचरे को अलग करना चाहिए जिससे इनका निपटान करने में आसानी हो।

    रोजाना दैनिक कार्यों से घर में निकलने वाले कचरों को इधर-उधर फेंकने की बजाय उनका उचित निपटान करना जरूरी होता है। इसके अलावा कई लोग हानिकारक और जल्द विघटित ना होने वाले खतरे को भूमि और महासागरों में फेंक देते हैं। हालांकि उन्हें इस बात की खबर नहीं होती कि यह कचरा फिर से खाद्य श्रृंखला के रूप में हमारे पास वापस आ जाता है।

    अपशिष्ट प्रबंधन के फायदे

    1. पर्यावरण की स्वच्छता

    जब हम अपशिष्ट का प्रबंधन करते हैं तो इससे कचरा पर्यावरण में जाकर नुकसान नहीं पहुंचाता। इस तरह से हम स्वच्छ और स्वस्थ पर्यावरण हासिल करते हैं।

    2. कच्चे माल की प्राप्ति

    हमें कचरे का निपटान करने से कच्चा माल प्राप्त होता है। हम कई बार पुनर्चक्रण की प्रक्रिया का इस्तेमाल करते हैं। इस प्रक्रिया का इस्तेमाल करने से हमें अन्य उत्पादों के लिए कच्चा माल हासिल होता है।

    3. ग्लोबल वॉर्मिंग और वायु प्रदूषण की रोकथाम

    जब कचरे का दहन किया जाता है तो इससे कई तरह की हानिकारक गैसे जैसे ही कार्बन डाइऑक्साइड और मीथेन निकलती है। जो कि वायु प्रदूषण व ग्लोबल वार्मिंग को बढ़ाती है। अगर हम कचरे का निपटान कर लेते हैं तो यह स्थिति पैदा नहीं होगी।

    4. ऊर्जा का संरक्षण

    जब हम उत्पादों को रीसायकल करते हैं तो इससे नष्ट होने वाली ऊर्जा की बचत होती है। वही पुनर्चक्रण की प्रक्रिया में कम ऊर्जा की आवश्यकता होती है।

    निष्कर्ष

    अपशिष्ट प्रबंधन के इस निबंध में हमने जाना कि किस तरह से यह कचरा मनुष्य के लिए घातक है तथा हम कौन-कौन से तरीकों के इस्तेमाल से कचरे का उचित प्रबंधन कर सकते हैं जिससे कि हमारे पर्यावरण को होने वाले नुकसान से बचाया जा सके। अगर कचरे का उचित प्रबंधन किया जाता है, तो इससे बीमारियां उत्पन्न नहीं होगी।

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